अशोक शर्मा, जम्मू। कहते हैं कि मां केवल जन्म नहीं देती, वह अपने बच्चों के सपनों को भी अपनी पलकों पर सजाकर उन्हें मंजिल तक पहुंचाती है। मदर्स डे पर जम्मू के नानक नगर की एक मां की कहानी हर उस बेटे-बेटी के लिए प्रेरणा है, जो संघर्षों के बीच अपने सपनों को सच करने की कोशिश कर रहे हैं।
जब गुरशरण सिंह केवल छह महीने के थे और बड़ी बहन अंकिता कौर मुश्किल से दो वर्ष की थी, तभी उनके सिर से पिता का साया उठ गया। अचानक आई इस त्रासदी ने पूरे परिवार को झकझोर दिया। घर में आर्थिक कठिनाइयां थीं, भविष्य अनिश्चित था, लेकिन मां हरप्रीत कौर ने हार मानने के बजाय अपने बच्चों के लिए खुद को मजबूत बना लिया। आंखों में दर्द था, लेकिन होंठों पर हौसला।
हरप्रीत कौर ने दिन-रात मेहनत कर अपने बेटे और बेटी को पढ़ाया-लिखाया। बेटी ने बैंक अधिकारी बनकर मां का नाम रोशन किया, वहीं बेटे गुरशरण सिंह ने कठिन परिस्थितियों को चुनौती देते हुए जम्मू-कश्मीर प्रशासनिक सेवा परीक्षा में चौथा स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया कि मेहनत और मां की दुआ मिल जाए तो कोई सपना अधूरा नहीं रहता।


