औरैया। जिले में दीपावली पर्व के बीच चले पटाखों ने वायु गुणवत्ता सूचकांक को 150 के करीब ला दिया है। ऐसे में दमा रोगियों को दिक्कत बढ़ गई है। उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही है। गुरुवार को शहर के जिला अस्पताल में 30 से ज्यादा दमा रोगी पहुंचे। जिन्हें नेबुलाइजर से उपचारित किया गया। कुछ ऐसा ही हाल चिचौली मेडिकल कॉलेज का भी रहा।दीपावली पर जमकर चली आतिशबाजी के बीच हवा प्रदूषित होनी शुरू हो गई। इसका असर मंगलवार से ही दिखने लगा था। बुधवार के बाद गुरुवार को भी आसमान में धुंध छाई रही। दिनभर आसमान में स्मॉग छाया रहा। इसके चलते सुबह की सैर सपाटे पर निकलने वाले लोगों की संख्या भी कम हो गई है। खासतौर पर हृदय और सांस के रोगी रहे। शहर के जिला अस्पताल की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी में गुरुवार को 30 से ज्यादा दमा रोगी पहुंचे। जिन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। ऐसे में डॉक्टरों ने उनका उपचार किया। परामर्श में उन्हें मुंह पर मास्क लगाकर चलने की सलाह दी गई।
पचनंद क्षेत्र में पांच नदियों का संगम है। इस कारण चंबल से घड़ियाल, कछुआ व डाल्फिन मछली बड़ी संख्या में यमुना में आ जाती है। जिनके संरक्षण की जरूरत है। स्थानीय लोगों को भी इन जलीय जंतुओं की जानकारी दी जा रही है ताकि वो भी इनका महत्व समझें। नमामि गंगे की जिला परियोजना अधिकारी साक्षी शुक्ला ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था की तरफ से कछुआ संरक्षण यमुना के किनारे किया जा रहा है। इससे कछुआ और घड़ियाल आदि की संरक्षण होगा और संख्या बढ़ेगी। इससे नदी का ईको सिस्टम ठीक होगा और फ्लो आदि अच्छा होगा।

