लखनऊ। राजधानी की निजी एंबुलेंस की मनमानी अब नहीं चल पाएगी। निजी एंबुलेंस का किराया तय होगा। इसे लेकर परिवहन विभाग प्रस्ताव शासन को भेज रहा है। शासन से अनुमति मिलने के बाद निजी एंबुलेंस का किराया तय किया जाएगा। अफसरों का कहना है प्रक्रिया पूरी होने में करीब एक से डेढ़ माह का वक्त लग सकता है।राजधानी में निजी एंबुलेंस मरीजों को ले जाने के लिए हवाई जहाज से भी महंगा किराया वसूल रही हैं। रेट तय न होने से निजी एंबुलेंस संचालक मरीजों को लूट रहे हैं। अमर उजाला ने प्रमुखता से इस मुद्दे को उठाया है। अब तक की पड़ताल में सामने आया है कि शहरी क्षेत्र के आठ से दस किमी दायरे में निजी एंबुलेंस चालक 100-120 रुपये प्रति किमी की दर से किराया वसूलते हैं। 100 किमी या इससे ज्यादा दूरी के लिए 30-40 रुपये प्रति किमी किराया लेते हैं। एडवांस लाइफ सपोर्ट वाली एंबुलेंस में यह किराया और भी महंगा हो जाता है। एंबुलेंस चालकों को इससे फर्क नहीं पड़ता कि कितना गरीब है। अमर उजाला ने खबरें प्रकाशित होने पर परिवहन विभाग के अफसरों ने केजीएमयू पहुंचकर करीब 35 निजी एंबुलेंस की जांच की है। अफसरों को चालकों को हिदायत दी है कि 10 रुपये प्रति किमी दर से ही किराया लें। आरटीओ प्रवर्तन प्रभात कुमार ने पांडेय ने बताया निजी एंबुलेंस का किराया तय करने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। शासन की स्वीकृति के बाद जिलाधिकारी के मार्गदर्शन में निजी एंबुलेंस के लिए किराये की दरें निर्धारित की जाएंगी। इसके बाद भी कोई एंबुलेंस अधिक किराया वसूलेगी तो उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
नीरज ने सीएमओ कार्यालय में इसकी शिकायत दर्ज कराई। दोनों पक्षों के बयान व साक्ष्य के आधार पर कमेटी ने विनोद अस्पताल को दोषी पाया। 18 जुलाई को इसका लाइसेंस निरस्त करने का आदेश कर खानापूर्ति कर दी गई थी। उधर, अस्पताल चलता रहा। नीरज ने डीएम से शिकायत की तो सख्ती हुई। सीएमओ ऑफिस से पहुंची टीम ने अस्पताल बंद करने का नोटिस चस्पा किया। इसके बाद संचालक ने मरीजों को दूसरी जगह शिफ्ट कराकर अस्पताल बंद कर दिया है। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह का कहना है कि अस्पताल बंद करा दिया गया है। अस्पताल संचालक डॉ. विनोद का कहना है अस्पताल अब पूरी तरह बंद है।


