Wednesday, February 11, 2026

खाप पंचायतों का सख्त फरमान! कहीं शादी में DJ बैन, कहीं स्मार्टफोन पर रोक—मथुरा, बागपत और जालोर तक तुगलकी फैसलों से मचा बवाल

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Mathura News: उत्तर भारत में खाप पंचायतें एक बार फिर अपने फैसलों को लेकर चर्चा में हैं। मथुरा, बागपत, जालोर और मुजफ्फरनगर में हाल ही में खाप पंचायतों ने ऐसे फैसले सुनाए हैं, जिनका सीधा असर शादियों, मोबाइल फोन के इस्तेमाल, पहनावे और लिव-इन रिलेशनशिप पर पड़ा है। पंचायतों का कहना है कि ये कदम सामाजिक अनुशासन और पारंपरिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए जरूरी हैं, लेकिन इन फैसलों को लेकर लोगों के बीच बहस और विरोध भी तेज हो गया है। इसी कड़ी में मथुरा में खाप पंचायत का नया ऐलान सामने आया है, जिसने मुस्लिम शादियों से जुड़े नियमों को और सख्त कर दिया है।

मथुरा पंचायत का नया फरमान
मथुरा की खाप पंचायत ने मुस्लिम समुदाय की शादियों को लेकर नए नियम जारी किए हैं। पंचायत के अनुसार अब शादी समारोह में डीजे बजाने पर रोक रहेगी। यदि किसी शादी में डीजे बजाया गया तो मौलाना निकाह नहीं पढ़ेंगे। इसके साथ ही मैरिज होम में निकाह करने की अनुमति भी नहीं होगी, निकाह केवल तय धार्मिक और पारंपरिक तरीके से ही संपन्न कराया जाएगा। इसके अलावा पंचायत ने सलामी, महंगे उपहार और आतिशबाजी पर भी रोक लगाने का फैसला किया है। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर 11 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। पंचायत का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य शादियों को सादा, कम खर्चीला और परंपरागत बनाना है।

बागपत की थंबा पट्टी मेहर देशखाप के फैसले
वहीं बागपत जिले की थंबा पट्टी मेहर देशखाप पंचायत ने भी हाल ही में कई सख्त फैसले लिए हैं। पंचायत ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए स्मार्टफोन इस्तेमाल पर रोक लगाने का निर्णय किया है। इसके साथ ही हाफ पैंट पहनने पर प्रतिबंध लगाते हुए पारंपरिक पहनावे को अपनाने की सलाह दी गई है। पंचायत ने यह भी तय किया है कि अब शादियां गांव या घर में ही होंगी, मैरिज हॉल में शादी करने को हतोत्साहित किया जाएगा। पंचायत का कहना है कि इन फैसलों का मकसद बच्चों और युवाओं को अनुशासन में रखना और उन्हें अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना है।

जालोर में महिलाओं के लिए स्मार्टफोन पर रोक
इसी सप्ताह राजस्थान के जालोर जिले में खाप पंचायत ने एक विवादित फैसला लेते हुए बहुओं और अविवाहित लड़कियों के लिए स्मार्टफोन के इस्तेमाल पर रोक लगाने का आदेश जारी किया था। इस फैसले के बाद पंचायत को कड़ा विरोध झेलना पड़ा और मामला कानून तक पहुंच गया। वहीं विरोध के चलते पंचायत ने इस फैसले पर पुनर्विचार करने के संकेत दिए हैं। पंचायत का कहना है कि उनका उद्देश्य महिलाओं को नियंत्रित करना नहीं, बल्कि उन्हें सुरक्षित रखना और परिवार की जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक करना था।

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